रविवार, 27 मार्च 2011

स्वामी ओमानंद जी की जन्मशती

स्वामी ओमानंद जी की जन्मशती 
  एक ऐसी शख्सियत जिन्होंने अपने जीवन को वैदिक आर्ष शिक्षा प्रणाली के लिय आहूत कर दिया. आज जब उनके जीवन को सूक्ष्मता से देखता हूँ तो मालूम होता है की किसी कार्य को जीवन का अंग बनाकर उसको जीना कितना कठिन होता है. आपने आजीवन अपने प्रण को जीवित रखा व दूसरों की प्रेरणा बनकर उनको रास्ता दिखाते रहे. आजीवन कार्य करने वालों का आप बहुत सम्मान करते थे. आपकी प्रेरणा से ही गुरुकुल में विद्यार्जन करने वाले अनेकों छात्रों ने आजीवन नैष्ठिक ब्रह्मचारी रहकर वैदिक शिक्षा का प्रचार व प्रसार किया है व कर रहे हैं | आपके पदचिन्हों पर चलकर अनेकों ने गुरुकुल की स्थापना करके स्वामी दयानंद जी के स्वप्नों को पूरा कर रहे हैं | आपकी जन्मशती के उपलक्ष्य में आयोजित गुरुकुल झज्जर में स्वामी रामदेव जी का आगमन २३.०३.२०११ को हुआ उन्होंने आपके कार्यों को यादकर के वास्तव में अपने कर्त्तव्य का ही निर्वहन ही किया है | हे महान आत्मा मैं आपके आगमने को शत-शत नमन करता हूँ | परमात्मा की शरण पाए आत्मन देव ! आपके कार्यों को अभिनंदन करता हूँ | अंत में आपके आदर्शों को जीवन में अपनाकर अपने संकल्पों को दृढ करने का पर्यंत करूगां |