मौनव्रत का ढौंग
सौ चूहे खाकर बिल्ली हज को चली वाली कहावत निश्चित रूप से स्वामी अग्निवेश जी पर चरितार्थ होती है। देश की जनता को बरगलाकर स्वामी अग्निवेश जी ने अपना जो उल्लू सीधा किया है, वह अब तक लोगों से छिपा रहा था। लेकिन अब जनता जागृत हो चुकी है व किसी भी प्रकार से झांसे में आने वाली नहीं है। स्वामी रामदेव जी व अन्ना हजारे जी के आन्दोलन से जो अंगडाई समाज ने ली है, उसको अब मूर्ख बनाना आसान नहीं होगा। देश के हालातों पर घड़ियाली आंसू बहाने वाले इन ढोंगी बाबाओं से सावधान रहने की पुरजोर आवश्यकता है। जो मियां व पादरी इनके आजू-बाजू दृष्टिगोचर होते थे उनसे भी सावधान होने की जरूरत है। गंगा गये तो गंगाराम जमुना गए तो जमनादास जैसे चरित्र वाले ढ़ोंगियों से सतर्क रहना आवश्यक है। अरे जो अपने देश का नहीं हो सका वह भला किसका हो सकता है। जिस थाली में खाते हैं उसी थाली में छेद करने वाले छेदीलालों से बचकर रहना होगा। आर्यसमाज रूप वटवृक्ष को धराशायी करने वाले इस आस्तीन के सांप से सजग रहने की जरूरत है। अन्ना हजारे ही नहीं अपितु स्वामी रामदेव जी के अनशन को भंग करने का षडयन्त्र अपने आकाओं के साथ अग्निवेश जी ने ही रचा हो यह भी तो शंका हो सकती है। अरे ! जो जहां जाता है वहीं की वाणी का प्रयोग करता है वह विश्वसनीय कैसे हो सकता है। कुछ लोग कार्य को महत्त्व न देकर अपनी छवि चमकाने में ही मशगूल रहते हैं। उन्हीं में से एक चेहरा है स्वामी अग्निवेश जी।
अब जब देखा कि चारों तरफ तुम्हारे निकृष्ट कार्यों से थू-थू हो रही है, तो श्री श्री रविशंकर जी शरण में पहुंच गए क्योंकि पता है यह भी एक चर्चित चेहरा है व वहां से कुछ राहत मिल सकती है। जब आप अपने आप को आर्य विचारधारा का घोषित कर सार्वदेशिक प्रतिनिधि सभा पर सोनिया जी के आशीर्वाद से घुसपैठ किये बैठे हो, तो अब श्री श्री जी की शरण में क्यों ? जब आप मुस्लिमों के बीच बैठकर अमरनाथ यात्रा को पाखण्ड घोषित करते हो तो अब किस आत्मिक शान्ति के लिए पाखण्ड का पोषण करने वालों की शरण में शरणागत हो गये हो ? क्या आर्य समाज में साधकों व साधना के उपायों की कमी थी जो श्री श्री की शरण लेनी पड़ी ? क्या आपका विश्वास जिसे आप हवन एण्ड कम्पनी कहते हैं उससे विश्वास उठ गया है ? अरे कुछ तो शर्म करो, इस ऋषियों के देश को अपने घृणित विचारों से मुक्त ही रहने दो तो अच्छा होगा। केवल मौन व्रत धारण करने से कृत पाप धुलने वाले नहीं हैं। अच्छा होगा जो हमेशा के लिए मौन धारण कर लें ताकि भारतीय जनमानस aapke कलुषित व दूषित विचारों से बच सके।