सोमवार, 21 नवंबर 2011

हिंद की चादर गुरु तेगबहादुर

हिंद की चादर गुरु तेगबहादुर 




जग जाता है देश, जब जवानी जाग जाती है।
मौत भी शरमा जाती है, जब कुर्बानी रंग लाती है।।

भारत आदिकाल से ही गुरुओं ऋषियों मुनियों देवों व वीरों की भूमि रहा है, रत्नगर्भा इस भारत भू ने अनेक स्वतंत्रता सेनानियों, धर्मध्वज संवाहकों, कालजयी सन्तों व शीश दानियों को प्रसूत कर विश्व को चमत्कृत किया है। सम्पूर्ण विश्व को नव सन्देश देने को आतुर इस देश के नरश्रेष्ठों ने अपने चारित्रिक बल से सबको आश्चर्यान्वित किया है। सुनो गौर से ऐ भारतीयों आज इस मंच के माध्यम से मैं ऐसे ही एक अनमोल रत्न का गुणगान करने को उपस्थित हुआ हूँ जिसके आत्मबल को भारत ही नहीं अपितु सम्पूर्ण विश्व व विश्व की अलौकिक शक्तियां नमन करने को उत्सुक हैं, मनुष्यों को ही नहीं अपितु देवों को भी अपने कार्यबल से नतमस्तक कर देने वाले महापुरुष की गाथा सुनाने चला हूं जिसकी लोमहर्षक हृदय विदारक व मानवता को विभूषित कर देने वाली कथा सुनकर सिर गर्वोन्नत हो जाता है। हे मां भारती पुत्रों वह उज्ज्वल रत्न कोई और नहीं अपितु मां भारती का लाड़ला पुत्र देश धर्म जाति व श्रेष्ठ मानवता की रक्षा के लिए बलिवेदी अपना शीश अर्पित करने वाले हिन्द की चादर के विशेषण से अंलकृत गुरु तेगबहादुर है।
शैशवावस्था में माता-पिता द्वारा रखे गये दुलार के नाम त्यागमल को सार्थक करते हुए उस दिव्यमानव ने अपना सर्वस्व समर्पित कर धर्मध्वजा को अवनत होने से बचाया हिन्दुओं की लगातार हो रही हानियों को देख उस नरपुंगव ने अपने समीप आये शरणार्थियों की भावना को जान विचारमग्न हुये इसी काल में अपने देवतुल्य पिता को चिन्तातुर देख पुत्र हरगोविन्दराय के द्वारा पूछे जाने पर कि आप चिन्तामग्न क्यों है तो पिता के इस उत्तर को सुन की पुत्र हिन्दू धर्म पर महासंकट उपस्थित हुआ है और इसके निराकरण के लिए मां भारती बलिदान चाहती है और ये बलिदान सामान्य व्यक्ति का नहीं अपितु महान व्यक्ति का होना चाहिए। बाल्यकाल में ही विशिष्टमति रखने वाले गुरुगौरव बाल हरगोविन्दराय ने कहा हे पूज्य पिताश्री आपसे बढ़कर और कौन महान होगा जिसके बलिदान से ये धर्म उन्नत व रक्षित हो सके अपने बालपुत्र की वार्ता पर गौर देकर गुरुओं की परम्परा में नौवें स्थान को अलंकृत करने वाले इस महापुरुष ने ये भाव अपने हृदय में संजोकर

देश धर्म पर मिटने को , जो मानव तैयार नहीं।
वीर नहीं वह कायर है, जिसको स्वदेश से प्यार नहीं।।

अपना बलिदान देना सहर्ष स्वीकार किया और उस नरपिशाच, नराधम, कुलकलंकी, गोत्रहत्यारे, आततायी, विदेशी आतंकी औरगंजेब को ललकारते हुए व मन मे भगवान कृष्ण द्वारा कहे गये उद्गारों यदा यदा हि धर्मस्य ग्लानिर्भति भारत। अभ्युथानमधर्मस्य तदात्मानं सृजाम्यहम्। को स्मरण कर अपना बलिदान देना स्वीकार किया। ये पावन पुण्य धरा ऐसे ही वीरबलिदानियों के बलिदान से थमी हुई है। ऐसे समय में अवश्य की समुपस्थित लोगों को हरगोविन्द का स्वरूप कृष्ण व गुरुतेगबहादुर का देदीप्यमान मस्तक महर्षि दधीचि जैसा प्रकाशमान दिखलाई दिया होगा जिन्होंने असुरों के संहार के लिए अपनी अस्थियों का दान इन्द्र को किया था।
ललकार के साथ ही सिख व हिन्दू हृदय सम्राट गुरुतेगबहादुर ने आततायी औरगंजेब की भरे दरबार में हुंकार भरते हुए कहा कि ओ बादशाह कानखोलकर सुन और अपने मौलवियों से पूछ कर बता कि कुरान में कहां लिखा है कि जब तक व्यक्ति की इच्छा न हो तो उसे उसकी इच्छा के विपरीत मुसलमान बनाया जाए। मतान्ध व राज्यनशे में मदमस्त औरंगजेब ने महान गुरु की वाणी को अनुसुना कर उनके साथियों सहित बन्दी बना लिया लेकिन सिंह गर्जना करते हुए गुरुतेगबहादुर जी ने कवि की वाणी में यही कहा कि

बान्धे जाते इन्सान कभी तूफान न बान्धे जाते हैं।
काया जरूर बान्धी जाती है अरमान न बान्धे जाते हैं।।

अनेक यातनायें व मुसलमान बनने के लिए दबाव दिया जाने लगा और यहां तक कि यदि मुसलमान नहीं बनोगे तो मार दिये जावोग के कथन के बाद आक्रान्ता औरगंजेब ने उनके दो शिष्यों को मौत के घाट उतारकर उनको डराना चाहा लेकिन आत्मा की अमरता का उपदेश देने व मानने वाले गुरु जी ने मौत को ही स्वीकार किया धर्मभ्रष्ट होना स्वीकार नहीं किया।
धन्य हो गई धरा जब मां भारती के ऐसे लाड़ले बेटों ने उसकी व धर्म की रक्षा के लिए अपने प्राणों को न्यौछावर कर दिया।
अन्त में मैं इतना ही कहना चहाता हूं बलिदान कभी व्यर्थ नहीं जाता स्वतन्त्रता की बलिवेदी पर प्राण न्यौछावर करने वालो का चरित्र प्रकाशपुंज बन सम्पूर्ण मानव जाति को प्रकाशित करता है और परम पावन पुनीतभावी गुरु तेगबहादुर का बलिदान शताब्दियों बाद भी हमारे लिए प्रेरणास्रोत बना हुआ है कवी की सुन्दर उक्ति के साथ मैं अपने वक्तव्य को विरमित करना चाहूंगा।
देश धर्म पर जब भी संकट बनकर आयेगा महाकाल।
तब-तब उबारेंगे इस भू को चढ़ा बलिवेदी पर अपना भाल।
तबतक सूरज चन्दा तारे नभमण्डल चमकायेंगे।
तकतक गुरुवर तेगबहादुर याद सभी को आयेंगे।।

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